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"यदि हमें सामाजिक उन्नति के स्तर को जानना है तो सबसे पहले उस समाज की महिलाओं की दशा का अध्ययन करना चाहिए। जब कोई बातचीत या वार्तालाप केवल सवाल-जवाब न होकर एक चर्चा का रूप...

  • Book Name: Voter Mata Kee Jai !
  • Author Name: Pratistha Singh
  • Product Type: Book
  • ISBN: 9789350728475
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    "यदि हमें सामाजिक उन्नति के स्तर को जानना है तो सबसे पहले उस समाज की महिलाओं की दशा का अध्ययन करना चाहिए। जब कोई बातचीत या वार्तालाप केवल सवाल-जवाब न होकर एक चर्चा का रूप ले लेती है तो कई परतें उभर कर आती हैं। मतदान के इन बहु-आयामी कारणों/कारकों को इस किताब में बख़ूबी पेश किया गया है। चुनाव केवल पुरुषों का कर्मक्षेत्र नहीं है, न ही होना चाहिए। और इस किताब को पढ़कर ये यक़ीन हो जाता है कि कम-स-कम बिहार में ऐसा नहीं है। चुनावों को लेकर महिलाओं का जो जोश रैलियों में हमने देखा था, उसी जोश से उन्होंने लेखिका से विचारविमर्श किया है। चुनावों पर अनेक तरह की समीक्षाएँ एवं आलोचनाएँ लिखी जाती रही हैं, ख़ासतौर पर बिहार के चुनावों पर। लेकिन यह किताब उन सब से अलग है। यहाँ बहुत ही सरलता और सहजता से एक गम्भीर सामाजिक बदलाव को प्रस्तुत किया गया है जिसका हम स्वागत करते हैं। यदि ऐसे विषय पर किसी राजनैतिक दल के द्वारा लेखन किया जाता है तो उसमें कुछ एकतरफ़ा स्वाद होने का ख़तरा हमेशा रहता है। यहाँ, चूँकि लेखिका राजनीति से संबंध नहीं रखती हैं, इसलिए उनके लेखन और नज़रिए में निष्पक्षता साफ़ झलकती है। बिहार की महिलाओं ने बेहद निडरता और जोश के साथ लेखिका से बातचीत कर यह साबित कर दिया है कि वे प्रगतिशील हैं। बिहार का यह सफ़रनामा इसलिए भी ख़ास है क्योंकि इसका मक़सद केवल बातचीत करना था। हम सफ़र क्यों करते हैं? क्या हर सफ़र का कोई लक्ष्य होना ही उसकी सफलता का सूचक है? या फिर सफ़र ख़ुद-ब-ख़ुद अंजाम तलाश लेता है? लोकतन्त्र में चुनावों के साथ-साथ फिलॉसफी के लिए भी स्थान होना चाहिए और इस लेखन में भी आप यह पाएँगे। स्थानीय भाषाओं का ज्ञान एवं उपयोग बढ़िया है। ‘परिशिष्ट’ के रूप में जोड़ी गयी शब्दावली और पदावली बेहद मज़ेदार होने के साथ काफ़ी सूचनाप्रद भी है। किताब सामाजिक जागरुकता की ओर एक बेहतरीन प्रयास है और इस लिहाज़ से सराहनीय है। —पवन कुमार वर्मा बिहार की महिला वोटर की आवाज़ को कोई नहीं कर सकता ‘ख़ामोश!’ —शत्रुघ्न सिन्हा एक अनूठा यत्न; प्रतिष्ठा के उद्योग की सराहना करनी होगी। उन्होंने ऐसी अभिलाषाओं को स्वर दिया है जो आमतौर पर सुनाई नहीं पडतीं। —संकर्षण ठाकुर, रोविंग एडिटर, दी टेलीग्राफ़ बिहार की राजनीति में महिलाओं की भूमिका को दर्शाता एक ‘नीमन’ प्रयास। —मनोज वाजपेयी "

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