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SKU: 9789350007938

ISBN: 9789350007938
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
No. of Pages: 144
विद्यापति वैष्णव थे, या शैव थे, या शाक्त थे-समालोचकों की खींचातानी सामान्य पाठकों को अवश्य ही मनोरंजक लगेगी। विरह-शृंगार वाले ये गीत तत्कालीन सामंतवर्ग...

  • Book Name: Vidyapati Ke Geet
  • Author Name: Nagarjun
  • Product Type: Book
  • ISBN: 9789350007938
Categories:
ISBN: 9789350007938
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
No. of Pages: 144
विद्यापति वैष्णव थे, या शैव थे, या शाक्त थे-समालोचकों की खींचातानी सामान्य पाठकों को अवश्य ही मनोरंजक लगेगी। विरह-शृंगार वाले ये गीत तत्कालीन सामंतवर्ग के मनोविज्ञान की सामग्री प्रतीत होते हैं। नर्तक और नर्तकियाँ भावभीनयपूर्वक इन गीतों को गाते थे। इन पदों के गीतभिनय सारी-सारी रात चलते रहते थे। राधा-कृष्ण वाले पदों में अंत वाली पंक्ति प्रायः ही आशा का संदेश देती है। मिलन होता और अवश्य होगा- इससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि महाकवि किसी भी स्तिथि में अपने श्रोताओं को निराश छोड़ना पसंद नही करता।
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