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Rs. 450.00
SKU: 9788181431585

ISBN: 9788181431585
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
No. of Pages: 330
यह पुस्तक साहित्य की ‘यथार्थवादी कोटि’ विदाई का स्वीकार है। हिन्दी वाले ज़्यादातर अभी तक ‘यथार्थवाद’ की कोटि’ में पड़े हैं। जबकि वह कोटि...

  • Book Name: Uttar Yatharthvaad
  • Author Name: Sudhish Pachauri
  • Product Type: Book
  • ISBN: 9788181431585
Categories:
ISBN: 9788181431585
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
No. of Pages: 330
यह पुस्तक साहित्य की ‘यथार्थवादी कोटि’ विदाई का स्वीकार है। हिन्दी वाले ज़्यादातर अभी तक ‘यथार्थवाद’ की कोटि’ में पड़े हैं। जबकि वह कोटि अब गिर चुकी है। ये लुकाच के दिन नहीं। ल्योतार-देरिदा के दिन है। हिलिस मिलर और उबर्तों केआर दिन हैं। वक़्त बादल गया है। दौर बादल गया है। क्रांतिकारी बुर्जआ वर्ग, उदार-बुर्जआ वर्ग, रूढ़िवादी हो चला है। मजदूर वर्ग भी उत्तर-समाजवादी दौर में वह औद्योगिक – क्रांतिकारी वर्ग नहीं रह गया है। यथार्थ और अनुभव को बनाने, सिद्ध करने वाले तत्व वृद्ध-पूंजीवाद या ‘एलईटी-कैपिलिज़्म’ ने बदल दिये हैं: उत्पादक सम्बन्धों में अब वह सीधापन और प्रत्यक्षता नहीं हैं।
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