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नयीबहार प्यार का पहला ख़त | हस्तीमल ‘हस्ती’ हस्तीमल ‘हस्ती’ की ग़ज़लों में आदमी की खुद्दारी की लौ जहाँ-तहाँ दिखती है। हालात पर खीझ है, ग़ुस्सा है, पर उसे ललकारने की कूवत भी है। प्रेरणा...

  • Book Name: Pyar Ka Pahle Khat
  • Author Name: HASTIMAL HASTI
  • Product Type: Book
  • ISBN: 9789387648951
Categories:

    नयीबहार प्यार का पहला ख़त | हस्तीमल ‘हस्ती’ हस्तीमल ‘हस्ती’ की ग़ज़लों में आदमी की खुद्दारी की लौ जहाँ-तहाँ दिखती है। हालात पर खीझ है, ग़ुस्सा है, पर उसे ललकारने की कूवत भी है। प्रेरणा भीतर से देते हैं वे, ग़ज़ल दो पंक्तियों में दस-बीस पन्ने की संवेदना उतार देती है। कम शब्दों में सच्चाई, ईमानदारी, समझदारी की बात ‘हस्ती’ की ग़ज़लों की विशेषता है। वे हर उलझन से बाहर आने की तरकीब भी सुझाते हैं, आत्मीय सलाह भी देते हैं- किस जगह रास्ता नहीं होता सिर्फ़ हमको पता नहीं होता बरसों रुत के मिज़ाज सहता है पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता

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