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आली’ ने तीस-चालीस साल अर्से में जो कुछ कहा है, वह कई लिहाज से अक़ील (महत्त्वपूर्ण) है। मैं उनकी ग़ज़लों को ज्यादा अहमियत देता हूँ-ग़ज़ल में इन्फ़िरादियत (अद्वितीयता) पैदा करना बहुत मुश्किल को भी आसान...

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    आली’ ने तीस-चालीस साल अर्से में जो कुछ कहा है, वह कई लिहाज से अक़ील (महत्त्वपूर्ण) है। मैं उनकी ग़ज़लों को ज्यादा अहमियत देता हूँ-ग़ज़ल में इन्फ़िरादियत (अद्वितीयता) पैदा करना बहुत मुश्किल को भी आसान बना लिया है-तक्सीमे-हिन्द (भारत विभाजन) के बाद यह अन्दाजों-आवाज किसी दूसरे ग़ज़ल-गो के यहाँ नहीं मिलती। ‘आली’ का उस्लूब उनका अपना है।

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